अपनी समृद्ध संस्कृति, भाषा और परंपराओं पर गर्व करें, यही हमारी असली पहचान है। दुनियाभर में फैला बंजारा समाज, लेकिन हमारी सब की एक ही संस्कृति और एक ही पहचान है। युवा पीढ़ी से लेकर बुजुर्गों तक साहित्य और कला की हमारी विरासत आज भी उतनी ही जीवंत है और रहेगी।
संत श्री सेवालाल महाराज के आशीर्वाद से समाज यूं ही प्रगति करता रहे। जय सेवालाल, जय लखिशाह बंजारा, जय बंजारा.
संत श्री सेवालाल महाराज के आशीर्वाद से समाज यूं ही प्रगति करता रहे। जय सेवालाल, जय लखिशाह बंजारा, जय बंजारा.
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